Monday, 26 August 2019

(Vasta Purana) वास्ता पुराना

वास्ता पुराना

हर लम्हा जो तेरी राह से गुजरा,
या तू मेरी दरमियान जब टकरा,
मानूँ क्या इसे एक बेतरतीब घटना ?
मगर दिल को लगा यह एक वास्ता पुराना

बातें कुछ मेरी हुई, बाकी तुम्हारी
शमा बस मेरी जली, माचिस तुम्हारी
कोई पूछे परवाना रोशन है या दीवाना ?
जो शमा के अक्स मैं चाहे जल जाना

यह अक्स एक दुनिया है, असल दुनिया
जल रहा है जहाँ पर, हर परवाना
शमा वस्ल की नहीं, जाने यह जमाना
शमा और परवाने का है महरबा पुराना 

Saturday, 1 June 2019

पहली मर्तबा

पहली मर्तबा

चाय पर चुस्कियां तो यारों के साथ बेहद लगायी,
पर काोफी पर मुलाक़ात तो पहली मर्तबा तुमने करवाई ।
ये कश्ती झूमते हुई चल रही थी, साहिल की और,
इस्तेक़ाम तो तुम्हारी सामानांतर हवाएं ही लायीं ।

कहते है की ज़िन्दगी से नफरत इंसान से ख़ुदकुशी करवाती है
बखत में तो ये समझता हूँ
कि इश्क़ से न न कोई कातिल है न होगा ।

अगर पलकें है तुम्हारी पिचर पौधे की तरह
तू पुतलियों की तरह
ये भवरा है उनमे जा फसा
सोचता हूँ कि तुम पलकें बंद करोगी
तो यह भवरा तुम्हे रोकेगा
अगर कर भी दोगी तो
में तो उनके आँचल मैं फंस गया था,
पहली मर्तबा । 

दिल इतना बेचैन क्यों?

दिल इतना बेचैन क्यों?

सर पर छत है, जेब में दौलत है
न सर्दी सता रही, और न ही कोई बीमारी
काम बखूबी चल रहा, न किसी से गिला न शिकवा,
तो फिर ये दिल इतना बेचैन क्यों ?

खुदा पर यकीन है, और अपनी मेहनत पर भी
विज्ञान पर यकीन है, और अपनी हसरत पर भी
वल्दा की दुआएं है, और जिस्म की कामनाएं भी
तो फिर ये दिल इतना बेचैन क्यों है ?

यह कुछ जुमले लिखकर सुकून मिलता है,
तो फिर क्या ये समझूँ की शायरी मेरा मुकाम है?
बखत फिर सोचता हूँ कि ये बेचैनी तो आम है
बचपन से ही आदत है दिल को, यूं बेवजह बेचैन रहने की
शायद यह आत्मा की जद्दोजहत है, जिस्म से कुछ कहने की

खैर आत्मा ने चाँद लब्ज़ लिखवा दिए है,
और अब कुछ रक्त और वक़्त बहेंगे, अंकों के दरिया में ।

प स - ज़िन्दगी जीने के लिए लिखना ज़रूरी है । 

बस अब तुम ही


बस अब तुम ही

इन काबिल--फकर नैनो का प्याला ,
पी कर जिन्हे मखमूर हुआ दिलवाला,
तेरी पलकों के परदे ने एक नूर सा दिखाया है,
ना सोने मैं, ना हीरे मैं... ना उस सूरज मैं वो बात है,
इन्ही आँखों का कमाल है.. के हमें इक राह है दिखी,
मंजिल हो जिसकी, बस अब तुम ही

उस अदब के होठों से तेरी आवाज़,
दिल पर वार करने वाले तेरे अलफ़ाज़,
उस वार का एहसास मद्धम हो रहा है,
सीना चीर दो, तब भी वो बात नहीं है,
ज़िन्दगी मैं वो बात नहीं, जो बात तेरी बात मैं है,
मेरी कहानी हो, बस अब तुम ही

Ishq ki

सोचना तुम्हे, लाये सादगी
लिखना तुम्हे, जैसे शायरी
एहसास तुम्हारा बेहद अफीमी,
एहसास तुम्हारा बेहद अफीमी।

यह सांसें न है मेरी न है तेरी,
यह सांसें तो है इश्क़ की।

मेरी कहानी मेरी नहीं,
तैर जवानी, तेरी नहीं
मेहरबानी है यह, उस परवरदिगार की
ये रूहानियत है, न तेरी न उस की
ये रूहानियत तो है इश्क़ की । 

ज़िन्दगी (Life)

ज़िन्दगी बस यादों का समंदर,
समायी है कितनी बूँदें इसके अंदर,
हर बूंद पता है उस गली का,
उस मकाम का, उस क्यास का,
कतरा-दर-कतरा कुछ यूं आपस में मिलता रहा,
और बनता रहा इन ख्वाबों का काफिला

तेरी बूँदें मगर हुजूम में सबसे अलग
मानो रहती हो, समादर की सतह पर
हर ख्वाब जो याद रह जाता है,
वो समंदर के अंदर सा शांत नहीं,
सतह की लहरों सा हंगामी है,
शायद वह तेरी बूंदों से बना है ।

अगर ऐसा नहीं तो क्यूँ हर शाम
जब गुज़रता है, इश्क़ का महताब,
तेरी ही लहरों आतंक सा ढाती है,
कुछ यादें तू छोड़ जाती, कुछ लेकर चली जाती है । 

Kya Likhein ?

क्या लिखें ?
क्या बयान करें ?
वह हसी या वो हवा
जो जुल्फों को तेरे, लहरा देती थी
या वो मशवरा, या वो दवा
जो मुश्किलों में तू पिला दिया करती थी
या फिर वो बेकरारी या खुमारी
जो तेरे आने से आती और जाने से बढ़ती थी ।

क्या लिखें ?
वह अलफ़ाज़ जो तेरे आने पर जज़्बातों से दब जाते थे
या वो सुर और साज
जो बिना कोशिश के ग़ज़ल बन जाते थे
या वह जज़्बा और जूनून,
जो रातों को जागकर काम मुकम्मल करवाता था
क्या लिखें ?
सब लब्ज़ तो आंसुओं से मिट जाते है
क्या कहें ?
सब यादें तो धुंधली सी हो जाती है
क्या समझाएं ?
वो धड़कनें जो चल रही मगर धड़क नहीं,
या ये की ये धड़कनें पहले किसी और के लिए थी

ज़िन्दगी दिलों का सफर है।
जिस्म वसल के लिए बेकरार है,
दिल फिराक होने की तलाश में है,
न तेरी मेरी कहानी वस्ल की है, न फिराक की
न दिल जुड़े है, न जिस्म मिले है,
बस सवाल है यह की
अब क्या लिखें और क्या बताएं ?